मेरी जानकारी है कि उस पुस्तक के अंगे्रजी और मराठी दोनों भाषाओं में संस्करण छप चुके हैं। अंगे्रजी संस्करण को लंदन में ए. बोन्नेर ने छापा है। पोस्ट आॅफिस ऐक्ट के अंतर्गत 11 जनवरी का आदेष केवल मराठी संस्करण पर लागू होता है, अतः आदेश की भाषा में संशोधन करना होगा। संशोधित आदेश में भाषा रखी जाए, ‘भारतीय विद्रोह पर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा मारठी में लिखित पुस्तक या पैंफ्लेट और उसका अंगे्रजी अनुवाद या रूपांतर।’

साथ ही स्टुअर्ट ने यह भी लिखा कि ‘‘बंबई सरकार का यह कथन कि घोषण-पत्र को तुरंत इंग्लैंड सूचित किया जाए, पुनर्विचार चाहता है। मेरे विचार से इंग्लैंड सूचना न भेजी जाए, क्योंकि पुस्तक की अधिक-से-अधिक प्रतियों को जब्त करने के लिए आवश्यक है कि इंग्लैंड में ही उसका जहाज से लदान रोका जाए। वहां नोटिस भेजने का परिणाम होगा कि सावरकर के मित्रगण को इसकी


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के कार्यक्रम व दिशा-निर्देश भी करना चाहते हैं। पूरे भारत में स्वतंत्रता की अलख जगाने का इससे अधिक प्रभावी व सफल माध्यम क्या हो सकता है कि उनके समाने उस क्रांतियु˜, जो निकट भूत में घटा था और जिसकी याद अभी ताजा है, का शु˜ इतिहास प्रस्तुत कर दिया जाए। स्वाभाविक ही, ऐसा ज्वलनशील इतिहास गं्रथ ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के लिए भारी डर का कारण बन गया था।

उन्हें कहीं से भनक लगी कि मूल ग्रंथ मराठी भाषा में लिखा गया है और भारत में कहीं उसे छापा जा रहा है। बंबई


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