हैं; परंतु मेरे स्थान पर हजारों क्रांतिकारी उत्पन्न होंगे और आपका उद्देश्य कभी भी पूरा नहीं होगा।’’
हे भारतीय जन! इन शब्दों को पूरा किया जाना चाहिए। ओ हुतात्माओ! हमारे रक्त का प्रतिशोेध अवश्य लिया जाएगा।
अनुक्रम
भाग- 1: ज्वालामुखी 31
1. स्वधर्म और स्वराज्य 33
2. कारण परंपरा
डलहौजी 44
3. नाना साहब और लक्ष्मीबाई 46
4. अवध 53
5. धकेलो उसमें ं ं ं 62
6. अग्नि में घी 72
7. गुप्त संगठन 78
भाग-2: विस्फोट 93
1. शहीद मंगल पांडे 95
2. मेरठ 100
3. दिल्ली 107
4. मध्यांतर और पंजाब 115
5. अलीगढ़ और नसीराबाद 140
6. रूहेलखंड 148
7. बनारस और इलाहाबाद 154
8. कानपुर और झांसी 176
9. अवध का रण 204
10. संकलन 218
भाग-3: अग्नि-कल्लोल 233
1. दिल्ली लड़ती है 235
प्रकाशन भी हुआ था। इस ग्रंथ का पाठन बार-बार किया जाता था। तमिल संस्करण का संपादन आजाद हिंद फौज के एक प्रचार अधिकारी जयमणि सुब्रह्यण्यम ने किया था। उन्होंने स्वयं ही बताया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आर्शीवाद से ही वह संस्करण तैयार हुआ था।
सावरकर द्वारा लिखित इतिहास की इस महान रचना ने सन् 1914 के गदर आंदोलन से 1943-44 की आजाद हिंद फौज तक कम-से-कम दो पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। बंबई की ‘फ्री हिंदुस्तान’ साप्ताहिक पत्रिका