2. हैवलाॅक 250
हिन्दू धर्म और हिंदू राज्य के लिए फिर एक बार जूझना होगा 257
3. बिहार 259
4. दिल्ली हारी 272
5. लखनऊ 284
6. तात्या टोपे 307
7. लखनऊ का पतन 316
8. कुंवर सिंह और अमर सिंह 333
9. मौलवी अहमद शाह 348
10. रानी लक्ष्मीबाई 357
भाग-4: अस्थायी शांति 391
1. विहंगावलोकन 393
2. पूर्णाहुति 404
यत्र-तत्र तात्या टोपे 404
3. समारोप 419
भाग-9
ज्वालामुखी
प्रकरण -9
स्वधर्म और स्वराज्य
धर्मासाठी मरावे, मरोनि अवघ्यांसी मारावें।
मारिता मारित घ्यावें, राज्य आपुलें।।
-स्वामी रामदास
अर्थात्-
धर्म हेतु मरें, मरते हुए सारों को मारें;
मारते-मारते जीतें, राज्य अपना।
कोई छोटा सा घर बनाना तो भी इतनी मजबूत नींव तो बनाई ही जाती है कि वह उसका भार सह सके।
ने मई 1946 में ‘सावरकर विशेषांक’ प्रकाशित किया, जिसमें के.एफ.नरीमन ने अपने लेख में स्वीकार किया कि ‘आजाद हिंद फौज की कल्पना और विशेषकर रानी रेजीमेंट के नामरण की मूल प्रेराा सन् 1857 की महान क्रांति पर वीर सावरकर की जब्तशुदा रचना में ही दिखाई देती है।’ ‘यदि सावरकर ने 1857 और 1943 के बीच हस्तक्षेप न किया होता तो मुझे विश्वास है कि आजाद हिंद फौज के ताजा प्रयासों को भी एक मामूली विद्रोह कह दिया गया होता। किंतु धन्यवाद है सावरकर की पुस्तक को कि